मकर संक्रान्ति

ठंड बढ़ी दिया – दिया , संक्रांति में घटे तिल – तिल
शिवरात्रि में कूद कुएं में बोले शिव – शिव

बचपन में दादा दादी से एक कहावत सुनी है कि दिवाली में दिवाली शुरू होने के बाद से दीया बराबर ठंड पड़ती हैं और वह बढ़ती जाती है और फिर मकर संक्रांति में तिल-तिल कर के कम होती है।
और महाशिवरात्रि आते तक शिव – शिव बोलते हुए कुएं में कूद जाती (मतलब सर्दी हो भी गरमी लगने लगती है और वो इसलिए कुएं में कूद जाती है) हो और पूरी खत्म हो जाती है।

यह बात तो मेरे बचपन में सुनी है। पहले इसे मजाक समझ के हंसते थे। मगर अब इस चीज का लॉजिक समझ में आता है । कि बारिश के बाद जब पूरे घर में पूरे वातावरण में नमी आ जाती है उससे उत्पन्न हुए कीटाणु को हटाने के लिए दिया जलाते है , जिससे वातावरण में गर्माहट होती है वातावरण दम साफ हो जाता है।

और फिर मकर संक्रांति आते तक ठंड थोड़ी कम होती है मगर पूरी भी नहीं होती तो वैसे में लोग लापरवाही कर देते हैं तो फिर बीमार पड़ सकते हैं । उसपे लॉजिक यह है तिली गर्म करती हैं और उसको खाने का यह बनाया है कि लोग तिल्ली के लड्डू बनाएंगे उसको खाएंगे और तिली में वैसे भी बहुत ही पौष्टिक तत्व होते हैं जैसे अमीनो एसिड , कैल्शियम, मैग्नेशियम, जिंक , सेलेनियम जो कि गर्म करते हैं ।

Published by Richagoswami

Co - Author of 80+ Anthologies

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