विश्व पर्यावरण दिवस

मैं सोच रही थी अगर पेड़-पौधे जीव – जंतु ना हो तो इनके बिना पृथ्वी कैसी लगेगी ? कल्पना भी नहीं कर सकते।
इनके संरक्षण के लिए जागरूक होना बहुत जरूरी है, क्योंकी जीवन तो इनके बिना है ही नहीं। नतीजा तो सब देख ही रहे है प्रकृति का शोषण करने का।
सिर्फ मनुष्य से पृथ्वी का अस्तित्व नहीं है, सबका बराबर का योगदान है। मगर हम भूल चुके है कि मनुष्य से पहले धरती पर पेड़-पौधे , नदी, तालाब थे।

मोबाइल टॉवर बहुतायत में लगने की वजह से रेडियोएक्टिव तरंगों के कारण पक्षियों को बहुत नुकसान हुए है, गौरैया तो लगभग विलुप्त सी हो गई है। गौरेया और दूसरी अन्य चिड़िया कीट- पतंगे खाती है। अंधाधुंध पेड़ कटाई और रेडिएशन कि वजह से चिड़िया बची ही नहीं और जिसका असर “टिड्डी प्रकोप”  देखने मिला था।
कोरोना और टिड्डी प्रकोप इंसानों की ही देन है , जो ऑक्सीजन सिलेंडर खरीद रहे है वो प्रकृति ने हमें पहले से दिए है पेड़ के रूप में मगर हमने स्वयं को ऑक्सीजन खरीदने मजबूर किया।
पेड़ ना होने की वजह से पक्षी नहीं है इसलिए टिड्डी प्रकोप हुआ था।

सिर्फ एक पेड़ 🌳हमारे लिए क्या करता है –
🌳एक बड़ा पेड़ 1 दिन में चार लोगों को ऑक्सीजन दे सकता है।
🌳एक पेड़ 1 साल में 21kg तक कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है।
🌳एक पेड़ साल में करीब 1.7kg डस्ट या प्रदूषक तत्व खत्म करता है।
🌳पेड़ किसी शहर के तापमान को 7 डिग्री तक कम कर सकते हैं।
🌳पेड़ पानी के चक्र का नियमितीकरण करते हैं।
🌳परिंदों का घर।
🌳मिट्टी का कटाव ,बाढ़ से बचाने में योगदान करते हैं।

Published by Richagoswami

Co - Author of 80+ Anthologies

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